प्रेम,दोस्ती,सब्र और सम्मान की दास्तां 😊(book review)

           "मिंटी" सब्र,दोस्ती,प्रेम और सम्मान की दास्तां 

पहली बार इस किताब को हाथ में लिया तो ये ख्याल आया की जैसे बाकी सब उपन्यास में प्रेम कहानी होती है वैसी ही यह भी होगी। जैसे ही पन्ने घुमाए में किताब के किरदारों में इतनी रसमग्न हो गई की जैसे समय का पता ही नही चला। कहानी  शुरू से लेकर अंत तक रहस्य से भरी पड़ी है! जो पाठक को तीव्र उत्कंठा में डालती है। प्यार और दोस्ती की एक अलग परिभाषा दिखाती है । अमित,अंकिता,साहिल और वंशिका यह सब पात्र कहानी के अंदर एक नई कहानी दिखाते है।

और इससे अतिरिक्त कहानी के अंदर अमित द्वारा लिखी गई कविताएं,सच में प्रेम का अहसास कराती है।कहानी में अतीत और वर्तमान के कई बिंदु जुड़े हुए लगते है।

यह कहानी और इसके किरदार ऐसे है की जो आपको अपने आप में बांधे रखते है।जिसे पूरी तरह न पढ़ ले तब तक किताब को अपने से दूर रखने का दिल नहीं करता। अब बात आती है किताब के मुख्य शीर्षक की जो की "मिंटी" है!! ये कोन है? अब ये नया रहस्य है!! पर सब्र करो सब जानने को मिलेगा! इस नए रहस्य को सुलझाने के लिए किताब पढ़नी होगी। पर यकीन मानिए की यह किताब आपको अपने भीतर से मिलवाएगी! 

लेखक दिलीपजी को मेरी बहुत बहुत सारी शुभकामनाएं।💐
भविष्य में एक उत्सुक पाठक के तौर पर आपकी किताबो का इंतजार रहेगा।😊🙏










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