दिवाली2024
शहर की भीड़ ने मुझे, अपने घर की मेहमान बना दिया ! अपने पुर के लिए कुछ कर दिखाने के जस्बे ने मुझे, मुझे खुद से पराया कर दिया..! सपनों की ऊंची उड़ान ने मुझे अपनो से दूर कर दिया...! इस औपचारिकता की हसी ने मुझे, भीड़ में भी अकेला छोड़ दिया..! लगता है अब न तो वो दिवाली है और न में पहले जैसी..! जीत के चक्कर में अपने ही घर में मेहमान से बन गए है..! फिर एक रोज हम और बड़े हो गए..! लेकिन आज भी ये दिवाली फिर से नई आश देती है..! कोने में बैठे बैठे अनायास एक रोशनी होती है..! पता नहीं ये रौशनी भीतर की थी या बाहर की????😊 ~©प्रेरणा✍️❤️